परम पूज्य डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी
महाराज | आध्यात्मिक मार्गदर्शक
डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी एक महान आध्यात्मिक गुरु, वक्ता एवं समाजसेवी हैं, जिन्होंने अपने जीवन को धर्म, सेवा और संस्कार के प्रसार के लिए समर्पित किया है।
🌸 जन्म एवं संस्कार
डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी महाराज का जन्म 9 फ़रवरी 1980 को काशी के एक प्रख्यात इटार पाण्डेय (सरयू पारीण्) विद्वान ब्राह्मण परिवार में हुआ।
बाल्यकाल से ही आप संस्कार, साधना एवं शास्त्रीय परंपराओं से ओत-प्रोत रहे।
शिक्षा एवं शास्त्राध्ययन
आपकी प्रारंभिक शिक्षा काशी के सुप्रसिद्ध विद्वान पं. हरिद्वार शास्त्री जी के संरक्षण में संपन्न हुई। तत्पश्चात काशी के अन्य प्रतिष्ठित आचार्यों से आपने—
वेद
व्याकरण
न्याय
ज्योतिष शास्त्र
की गहन एवं विधिवत शिक्षा प्राप्त की।
उच्च शिक्षा आपने काशी के गौरव — बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से प्राप्त की, जहाँ से आपने—
ज्योतिषाचार्य
एम.ए. (संस्कृत)
पी.एच.डी.
की उपाधियाँ अर्जित कीं।
आज आप काशी के विशिष्ट विद्वानों में गिने जाते हैं और कथा के माध्यम से काशी की विद्वत् परंपरा को देश-विदेश में प्रतिष्ठित कर रहे हैं।
बाल्यकाल की विलक्षण प्रतिभा
बाल्यकाल में ही आपने—
लघु सिद्धांत कौमुदी
अमरकोश
तर्कसंग्रह
श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद्भागवत महापुराण
के अनेक श्लोक कंठस्थ कर लिए थे।
अल्पायु में आपकी असाधारण स्मरण-शक्ति, तर्कबुद्धि एवं शास्त्र-प्रेम ने विद्वानों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
🕉️ कथा वाचन एवं वैदुष्य
डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी महाराज शास्त्रसम्मत, तर्कपूर्ण एवं भावपूर्ण कथा वाचन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। आप—
अट्ठारह पुराण
वाल्मीकि रामायण
श्रीमद्भागवत महापुराण
देवी भागवत
श्रीराम कथा
शिव महापुराण
के मर्मज्ञ विद्वान हैं।
आपकी कथाएँ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय सहित भारत के अनेक विश्वविद्यालयों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों में निरंतर आयोजित होती रहती हैं।
अपने शास्त्रीय योगदान के लिए आपको अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
🪔 परंपरा एवं वंशावली
आपकी वंशावली अत्यंत प्राचीन एवं विद्वतापूर्ण रही है।
आपके दादा जी पं. हरिद्वार शास्त्री जी ने सन 1942 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से आचार्य एवं संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की थी।
डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी महाराज अपनी विद्वान परंपरा की 24वीं पीढ़ी में कथा वाचक हैं। आपके परिवार में पीढ़ियों से—
कथा वाचन
वेदाध्यापन
ज्योतिष परामर्श
की परंपरा निरंतर चली आ रही है।
🛕 संप्रदाय एवं उपाधि
आप श्री वैष्णव संप्रदाय (रामानुजीय परंपरा) से दीक्षित हैं।
संत समाज द्वारा आपको “जगद्गुरु रामानुजाचार्य” की उपाधि से विभूषित किया गया है।
👨👩👦 पारिवारिक परिचय
धर्मपत्नी: श्रीमती अंजनी पाण्डेय
तीन पुत्र—
ज्येष्ठ पुत्र – एम.बी.बी.एस. डॉक्टर
द्वितीय पुत्र – केशव जी
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत
बालव्यास के रूप में प्रसिद्ध
भागवत, रामायण, गीता, व्याकरण, न्याय एवं दर्शन का अध्ययन
तृतीय पुत्र – मेडिकल की तैयारी में संलग्न
समर्पण एवं साधना
डॉ. पुण्डरीक शास्त्री जी महाराज आज भी सनातन धर्म, शास्त्र और संस्कारों की दिव्य परंपरा को कथा, सत्संग एवं साधना के माध्यम से समाज तक पहुँचाने में सतत् संलग्न हैं।
धर्मो रक्षति रक्षितः
